है दी आवाज फ़रिश्तों ने, जमीं के लोगों को
कोरस: है दी आवाज फ़रिश्तों ने, जमीं के लोगों को
उतर आया जहां में अब, खुदा इन्सां बनके।
1. वह आया है गुनाह की क़ैद से आजाद करने को
जो उजड़े ज़िन्दगी के बाग, उन्हें आबाद करने को
न हो मायूस खुदा आया उम्मीदों का जहां बनके।
2. जो बैठे है अंधेरे में वो आयें रौशनी देखें
ग़मों में रहने वाले ज़िन्दगी की हर खुशी ले लें
वह आया है खुदा इन्सान बनके, मेहरबां बनके।
3. हमारे वास्ते वह आस्मानी प्यार लाया है
नया जीवन, नई राहें नया संसार लाया है
कभी जो खत्म न हो आया ऐसी दास्तां बनके।
Comments
Post a Comment