वह चश्मा है मामूर, दाग दिल से करता है दूर।

 1. दिल के दाग को धोवे कौन, लहू जो कि क्रूस से जारी।

    मेरे मर्ज़ को धोवे कौन, लहू जो कि क्रूस से जारी।।

कोरसः वह चश्मा है मामूर, दाग दिल से करता है दूर।

           है मुझको दिल मंजूर लहू जो कि क्रूस से जारी।।

2. मेरे मर्ज का शाफ़ी है लहू जो कि क्रूस से जारी है। 

     मूआफी की वह काफी है, लहू जो कि क्रूस से जारी है।।

3. वह है मेरे कर्ज का दाम, लहू जो कि क्रूस से जारी है। 

     वह है मेरा खास इनाम, लहू जो कि क्रूस से जारी है।।

4. मेरी वह उम्मीद है खास, लहू जो कि क्रूस से जारी है। 

    रास्ती का है खुश लिबास, लहू तो कि क्रूस से जारी है।।

5. दुःख तकलीफ़ में है पनाह, लहू जो कि क्रूस से जारी है। 

    वह है मेरे घर की राह, लहू जो कि क्रूस से जारी है।।

6. मेरे गीत का है मज़मून, लहू जो कि क्रूस से जारी है। 

    मुझ को करता है ममनून, लहू तो कि क्रूस से जारी है।।

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