प्रभु महान विचारुं कार्य तेरे,

 प्रभु कितना महान (672)

1. प्रभु महान विचारुं कार्य तेरे, कितने अदभुत जो तूने बनाये

    देखूं तारे सुनूं गर्जन भयंकर, सामर्थ्य तेरी सारे भूमण्डल पर ।। 

     प्रशंसा होवे प्रभु यीशु की

     कितना महान, कितना महान ।।

2. तराई में या वन के मध्य में घूमूं, मधुर संगीत मैं चिड़ियों का सुनूं 

    पहाड़ विशाल से जब मैं नीचे देखूं, झरने बहते लगती शीतल वायु ।।

     प्रशंसा होवे प्रभु यीशु की

     कितना महान, कितना महान ।।

3. पिता ने मेरे लिए अपना पुत्र, मरने भेजा है वर्णन से अपार 

    क्रूस पर उसने सब मेरे पाप को लेकर बहाया रक्त कि मेरा हो उध्दार

    प्रशंसा होवे प्रभु यीशु की

    कितना महान, कितना महान ।।

4. मसीह आवेगा शब्द तुरही का होगा, ले चलेगा जहां आनन्द महान 

    मैं झुकूंगा साथ आदर भक्ति दीनता, और गाऊंगा "प्रभु कितना महान' ।।

    प्रशंसा होवे प्रभु यीशु की

    कितना महान, कितना महान ।।


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